Monday, June 15, 2026

डॉ. पी. कृष्णम राजू: नाड़ीपथी के पीछे की प्रेरणादायक यात्रा

विश्व की प्रथम नाड़ीपथी चिकित्सीय उपचार पद्धति के प्रणेता

परिचय

हर महान उपचार पद्धति के पीछे एक दूरदर्शी सोच, वर्षों का शोध, समर्पण और मानव सेवा का भाव होता है। नाड़ीपथी चिकित्सीय उपचार (Nadipathy Therapeutic Treatment) के संस्थापक डॉ. पी. कृष्णम राजू ऐसे ही एक दूरदर्शी शोधकर्ता, वैकल्पिक चिकित्सक, शिक्षाविद् और भारतीय पारंपरिक उपचार प्रणालियों के प्रचारक हैं।

पिछले कई दशकों से डॉ. कृष्णम राजू प्राकृतिक स्वास्थ्य, भारतीय पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों, निवारक स्वास्थ्य सेवा, ऊर्जा-आधारित उपचार, पर्यावरण संरक्षण तथा सतत जीवनशैली पर निरंतर शोध कर रहे हैं।

उनका उद्देश्य केवल रोगों का उपचार करना नहीं, बल्कि मनुष्य, प्रकृति, ऊर्जा और समग्र स्वास्थ्य के बीच के गहरे संबंध को समझाना और उसे जन-जन तक पहुँचाना है।

आज नाड़ीपथी एक ऐसी विशिष्ट चिकित्सीय प्रणाली के रूप में जानी जाती है, जो रोग के मूल कारण की पहचान, नाड़ी परीक्षण, पंचमहाभूत संतुलन, शरीर की प्राकृतिक शुद्धि (डिटॉक्सिफिकेशन) तथा प्राकृतिक उपचार पर विशेष बल देती है।


प्राकृतिक उपचार के प्रति आजीवन समर्पण

डॉ. कृष्णम राजू को बचपन से ही प्राकृतिक उपचार पद्धतियों के प्रति गहरी रुचि थी।

वे सदैव यह जानना चाहते थे कि मानव शरीर स्वयं कैसे स्वस्थ होता है, रोग क्यों उत्पन्न होते हैं और प्रकृति के साथ सामंजस्य स्थापित करके बेहतर स्वास्थ्य कैसे प्राप्त किया जा सकता है।

उन्होंने स्वयं को किसी एक चिकित्सा प्रणाली तक सीमित नहीं रखा, बल्कि भारत और विदेशों की अनेक पारंपरिक उपचार पद्धतियों का अध्ययन किया और उनमें निहित ज्ञान का गहन अनुसंधान किया।

इसी शोध ने आगे चलकर नाड़ीपथी के विकास का मार्ग प्रशस्त किया।


उत्कृष्ट शैक्षणिक उपलब्धियाँ

डॉ. कृष्णम राजू की बहुआयामी शैक्षणिक पृष्ठभूमि उनके शोध और अध्ययन की गहराई को दर्शाती है।

उनकी प्रमुख शैक्षणिक योग्यताएँ हैं:

  • M.P.Ed.

  • N.I.S.

  • योग में स्नातकोत्तर डिप्लोमा

  • B.A. (Acupuncture)

  • M.A. (Acupuncture)

  • B.N.Y.S.

  • B.A.S.M.

  • एडवांस्ड डिप्लोमा इन सुजोक

  • Ph.D. (Nadipathy)

  • D.Sc.

उन्होंने विशेष प्रशिक्षण भी प्राप्त किया है:

  • बीजिंग (चीन) से एक्यूपंक्चर

  • दक्षिण कोरिया से सुजोक थेरेपी

  • भारत एवं अन्य देशों की अनेक पारंपरिक उपचार प्रणालियों में विशेष अध्ययन

इस व्यापक शिक्षा ने उन्हें शारीरिक स्वास्थ्य, ऊर्जा चिकित्सा, प्राकृतिक उपचार और समग्र स्वास्थ्य को एकीकृत करने की दृष्टि प्रदान की।


नाड़ीपथी का पुनर्प्रस्तुतीकरण

डॉ. कृष्णम राजू का सबसे महत्वपूर्ण योगदान प्राचीन भारतीय उपचार प्रणाली को "नाड़ीपथी" नाम देकर आधुनिक समाज के सामने प्रस्तुत करना है।

नाड़ीपथी के सिद्धांतों के अनुसार यह प्रणाली प्राचीन भारतीय ज्ञान पर आधारित है, जिसमें नाड़ी तंत्र, सूक्ष्म शरीर, पंचमहाभूत और प्राकृतिक उपचार का विशेष महत्व है।

डॉ. कृष्णम राजू ने इस प्राचीन ज्ञान को संरक्षित करते हुए इसे वर्तमान पीढ़ी के लिए सरल और उपयोगी रूप में प्रस्तुत किया।


केवल लक्षण नहीं, मूल कारण पर उपचार

डॉ. कृष्णम राजू का मानना है कि वास्तविक उपचार रोग के मूल कारण की पहचान से प्रारंभ होता है।

नाड़ीपथी में रोगी का समग्र मूल्यांकन किया जाता है, जिसमें शामिल हैं:

  • नाड़ी परीक्षण (Nadi Pariksha)

  • जीभ का निरीक्षण

  • आँखों का परीक्षण

  • दाँतों का निरीक्षण

  • नाखूनों का अध्ययन

  • चेहरे का अवलोकन

  • चलने की शैली

  • बैठने की मुद्रा

इन सभी पारंपरिक निरीक्षणों के आधार पर रोगी की समग्र स्थिति को समझने का प्रयास किया जाता है।


औषधि-रहित उपचार दर्शन

नाड़ीपथी निम्नलिखित सिद्धांतों पर आधारित है:

  • 0% दवाएँ

  • 0% शल्य चिकित्सा

  • प्राकृतिक उपचार पद्धतियाँ

  • समग्र स्वास्थ्य

  • निवारक स्वास्थ्य सेवा

  • रोग के मूल कारण पर आधारित उपचार

इसका उद्देश्य शरीर की प्राकृतिक उपचार क्षमता को सक्रिय करना है।


डॉ. पी. कृष्णम राजू की 32 शोध-आधारित जीवन कलाएँ

डॉ. कृष्णम राजू का योगदान केवल नाड़ीपथी तक सीमित नहीं है।

दशकों के शोध, प्रयोग, अवलोकन और व्यावहारिक अनुभव के आधार पर उन्होंने 32 शोध-आधारित जीवन कलाओं (Research-Based Living Arts) का विकास किया, जिनका उद्देश्य मानव स्वास्थ्य, पर्यावरण संरक्षण, प्राकृतिक जीवनशैली, पशु कल्याण और समग्र विकास को प्रोत्साहित करना है।

इनमें प्रमुख हैं:

  1. नाड़ीपथी

  2. वेद चिकित्सा

  3. नाड़ी हीलिंग

  4. ए.पी.टी. थेरेपी

  5. वैदिक थेरेपी

  6. समुद्री रेत चिकित्सा

  7. प्रसव-पूर्व चिकित्सा

  8. सात पीढ़ी निदान प्रणाली

  9. एक्यूपंक्चर प्रणाली

  10. जिल्लेडु (आक) के दूध से नेत्र उपचार

  11. सौर चिकित्सा

  12. सोरायसिस उपचार

  13. हरी पत्तियों द्वारा उपचार

  14. गोबर आधारित उपचार

  15. वृक्ष आलिंगन चिकित्सा

  16. प्राचीन जनजातीय उपचार पद्धतियाँ

  17. मिट्टी स्नान चिकित्सा

  18. मधुमक्खी चिकित्सा

  19. गौ आलिंगन चिकित्सा

  20. वैरिकोज़ वेन्स उपचार

  21. हैमर थेरेपी

  22. प्याज़ चिकित्सा

  23. उन्नत जोंक चिकित्सा

  24. उन्नत नाड़ी निदान

  25. सुई द्वारा वात–पित्त–कफ संतुलन

  26. लंबाई बढ़ाने की चिकित्सा

  27. लंबाई नियंत्रित करने की चिकित्सा

  28. ध्वनि चिकित्सा

  29. सूर्य प्रकाश चिकित्सा

  30. शिव शूलिनी चिकित्सा (शोध चरण)

  31. शरीर डिटॉक्सिफिकेशन उपचार

  32. बिना दवाओं की एक्वा कल्चर एवं मिनिएचर गाय अनुसंधान

ये 32 जीवन कलाएँ मानव, प्रकृति, पशु और पारंपरिक ज्ञान के बीच संतुलित एवं स्वस्थ जीवन की अवधारणा को दर्शाती हैं।


पुरस्कार एवं सम्मान

प्राकृतिक चिकित्सा, वैकल्पिक उपचार, अनुसंधान, सामाजिक सेवा और जनस्वास्थ्य के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए डॉ. पी. कृष्णम राजू को अनेक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों और सम्मानों से सम्मानित किया गया है।

प्रमुख सम्मान:

  • स्टार वर्ल्ड रिकॉर्ड्स

  • प्राइड इंडिया एक्सीलेंसी अवार्ड

  • महात्मा गांधी फेलोशिप (MGF)

  • मदर टेरेसा राष्ट्रीय फेलोशिप अवार्ड

  • न्यू लाइफ थियोलॉजिकल यूनिवर्सिटी द्वारा इंटरनेशनल लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड

  • सर आर्थर कॉटन बेस्ट सर्विस अवार्ड

  • यूनाइटेड वर्ल्ड रिकॉर्ड्स

  • इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स

  • तेलुगु बुक ऑफ रिकॉर्ड्स

  • बुक ऑफ स्टेट रिकॉर्ड्स

  • वर्मा बुक ऑफ रिकॉर्ड्स

  • इंटरनेशनल वंडर बुक ऑफ रिकॉर्ड्स

  • इंडो-वियतनाम हेल्थ अवार्ड

  • बेस्ट यूथ अवार्ड

  • एक्यूप्रेशर रत्न पुरस्कार

ये सम्मान प्राकृतिक उपचार, अनुसंधान, शिक्षा, सामाजिक सेवा और जनस्वास्थ्य जागरूकता के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान की पहचान हैं।


शोध, शिक्षा और जनजागरण

चिकित्सक होने के साथ-साथ डॉ. कृष्णम राजू एक प्रेरणादायक शिक्षक और शोधकर्ता भी हैं।

उनका उद्देश्य है:

  • भारतीय पारंपरिक चिकित्सा ज्ञान का प्रचार-प्रसार

  • प्राकृतिक स्वास्थ्य के प्रति जनजागरूकता

  • निवारक स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ावा देना

  • प्रकृति-आधारित जीवनशैली को प्रोत्साहित करना

  • भावी शोधकर्ताओं को प्रेरित करना


आज का नाड़ीपथी

वर्तमान में नाड़ीपथी निम्नलिखित क्षेत्रों पर कार्य कर रही है:

  • नाड़ी परीक्षण

  • रोग के मूल कारण की पहचान

  • प्राकृतिक उपचार

  • शरीर की शुद्धि (डिटॉक्सिफिकेशन)

  • पंचमहाभूत संतुलन

  • समग्र स्वास्थ्य

  • जीवनशैली आधारित स्वास्थ्य देखभाल

  • निवारक चिकित्सीय सेवाएँ


आने वाली पीढ़ियों के लिए एक विरासत

डॉ. पी. कृष्णम राजू की यात्रा केवल एक उपचार प्रणाली की स्थापना तक सीमित नहीं है।

उन्होंने भारत की प्राचीन चिकित्सा विरासत को संरक्षित करने, उस पर शोध करने और उसे आधुनिक समाज तक पहुँचाने का महत्वपूर्ण कार्य किया है।

उनकी विकसित की गई 32 शोध-आधारित जीवन कलाएँ मानव जीवन, प्रकृति, पशु कल्याण और सतत विकास के बीच संतुलन स्थापित करने का एक अनूठा प्रयास हैं।


निष्कर्ष

डॉ. पी. कृष्णम राजू का जीवन शोध, सेवा, समर्पण और भारतीय पारंपरिक ज्ञान के संरक्षण का प्रेरणादायक उदाहरण है।

नाड़ीपथी के संस्थापक, शोधकर्ता, शिक्षाविद् तथा 32 शोध-आधारित जीवन कलाओं के जनक के रूप में उन्होंने प्राकृतिक स्वास्थ्य और समग्र जीवनशैली को नई दिशा प्रदान की है।

उनका कार्य हमें यह संदेश देता है कि स्वस्थ जीवन का आधार केवल उपचार नहीं, बल्कि प्रकृति के साथ संतुलित जीवन, निवारक स्वास्थ्य और पारंपरिक ज्ञान का सम्मान भी है।

उनकी प्रेरणादायक यात्रा आने वाली पीढ़ियों को प्राकृतिक चिकित्सा, अनुसंधान और मानव कल्याण की दिशा में निरंतर आगे बढ़ने की प्रेरणा देती रहेगी। 

नाड़ीपथी ग्लोबल सेंटर – काकीनाडा

ACUPRESSURE HEALTH CARE CENTRE

पता:
डोर नं. 2-537, ऐश्वर्याम्बिका मंदिर मार्ग (श्रीपीठम्),
बैंक ऑफ बड़ौदा के पीछे, रामनय्यापेटा,
काकीनाडा, आंध्र प्रदेश – 533005

प्रभारी: डॉ. पी. विजय लक्ष्मी

समय: प्रातः 6:00 बजे से सायं 6:00 बजे तक
(सोमवार से शनिवार)

दूरभाष: 0884-2372345

मोबाइल: 8885011326 / 8886011320


नाड़ीपथी शाखा – हैदराबाद

पता:
#12-6-2/2227, TVR कॉलोनी, कुकटपल्ली,
मेट्रो स्टेशन के निकट, पिलर नं. 817,
भाजपा कार्यालय के सामने,
हैदराबाद, तेलंगाना – 500072

प्रभारी: डॉ. बी. कल्याण

दूरभाष: 040-24242345

मोबाइल: 8885011322 / 8885011324

समय: प्रातः 6:00 बजे से सायं 6:00 बजे तक (प्रतिदिन) 

No comments:

Post a Comment